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Publish Date: Aug 08, 2016
राग से ही बढ़ता है संसार: विराग सागर
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भिण्ड,हि.स.। धर्मनगरी भिण्ड की पावन धरा पर 16 वर्षों के बाद परम पूज्य अध्यात्म योगी, सूरिगच्छाचार्य भिण्ड के देवता, राष्ट्रसंत, गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज का चातुर्मास हो रहा है। आज की सभा को मंगल उद्बोधन देते हुए बताया कि भगवान महावीर स्वामी ने अपनी दिव्य देशना में कोई कविता, मुक्तक या दोहे नहीं कहे, हास्य व्यंग्य के कार्यक्रम नहीं किए, उन्होंने प्राणीमात्र को मोक्षमार्ग पर चलने का उनके हित का ही उपदेश दिया जिनेन्द्र देव ने अपनी वाणी मे छह द्रव्यों सात तत्वों को अपने उपदेश मे बताया उसी को हम सभी ने यहां समझा है।    
आचार्य श्री ने आगे कहा कि हम सभी जंबूद्वीप में रहते हैं। इसके बीच में एक लाख योजन वाला सुमेरू पर्वत है आज हम जैन होकर भी अपने जंबूद्वीप, मध्यलोक, ढाईद्वीप, सुमेरू पर्वत आदि के बारे में नहीं जानते कोई हमसे इस धरोहर के विषय में पूछे और हम मना कर दे ये हमारे लिए शर्म की बात होगी हम दिन-रात फिल्मी गाने सुनते हैं और एक बार में ही याद हो जाते है लेकिन जिनवाणी के चार अक्षर याद नहीं हो पाते यह जीव पंचेन्द्रिय विषयों के कारण संसार में दुखी है इस जीव ने कभी भगवंतों की संतों की वाणी को कभी सुनने का व आचरण मे उतारने का प्रयास ही नहीं किया, बस राग द्वेष मे फंसकर अपने अमूल्य समय को बर्वाद किया, विषया शक्ति मे आसक्त यह प्राणी अपने लक्ष्य को भूल जाता है।     
आचार्य श्री ने आगे बताया कि ध्यान रखना कि ये वासनाएं प्रांरभ मे संताप उत्पन्न करती है प्राप्त हो जाएं तो छूटती नहीं है और अंत मे जब यह शरीर शिथिल हो जाता है वह दुखी होकर छोड़ता तो नहीं है पर छोडऩा पड़ती है अंत समय की दहलीज पर आकर अपने जीवन मे शीलव्रत ले लो इतनी आसक्ति विषयों से नहीं होनी चाहिए इन संतो ने छोटी उम्र में ही अपने जीवन में इतनी त्याग तपस्या की अपने जीवन को व्रत संयम मे ढाला सब कुछ त्याग दिया। अपने मन को इतना पवित्र बनाया सभी विषयाशक्ति से मन को हटाकर धर्मध्यान के सूत्रों को जीवन मे उतारा हमारे तीर्थकरों, महापुरुषों ने भी इस काम वासना पर विजय प्राप्त कर ली इन वासनाओं में कभी भी इनका मन विध न सका। भोले प्राणी अब सावधान हो जाओ संभल जाओ साधना के प्रति धर्म ध्यान के प्रति अपना मन लगाओ अंत मे भी अगर आपने परिणामों को सुधार लिया तो भी किसी न किसी भव मे मुक्ति हो जाएगी, नहीं तो यह जीवन कोरा ही रह जाएगा, जो करना है आज ही कर लो अंत के भरोसे भी मौत बैठना क्योंकि मृत्यु कभी समय नहीं देखती कब विपत्ति आ जाए सारी योजना रखी ही रह जाए, अपने जीवन को संयम से बांधकर अपना भविष्य उज्जवल बनाओ।
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