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बिहार चुनाव
Publish Date: Aug 02, 2016
इंडो-नेपाल बार्डर पर उत्पन्न विवाद निजी स्वार्थों का परिणाम


पटना/सुपौल।

बिहार में सुपौल जिले का उत्तरी भाग नेपाल सीमावर्ती है, जिसमें खासकर कोसी नदी प्रमुख रूप से उबलती और बलवती धाराओं के साथ प्रभावित करती है । जिले के कुनोली बार्डर पर विगत सप्ताह खाड़ो नदी का बांध टूटने से सीमावर्ती भारतीय सीमा के गांवो में जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है, जिसने दोनों देशों की ऐतिहासिक मित्रता व बेटी -रोटी के रिश्ते पर सवालिया निशान लगा दिया है। हालांकि यह समस्या व्यक्तिग तौर पर उत्पन्न की गई हैं ।
    प्राप्त जानकारी अनुसार भारत -नेपाल का पिलर संख्या - 223 का प्रतीक चिन्ह वर्षों से खाड़ो नदी के बाढ़ में विलीन हो चुका है । इसके बाद से नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों ने इसे निजी उपयोग में ले लिया। सीमा सुरक्षा के पदाधिकारी इसकी गहराई पर समयबद्ध सीमांकन शायद नहीं कर पाए, जिसका दुष्परिणाम गत 28 जुलाई को दोनों देश के नागरिकों के बीच हुई मारपीट की नौबत के रूप में सामने आया।
    दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सन 1987 से धीरे-धीरे उत्पन्न हुआ । चूंकि वर्ष 1987 में इस सीमावर्ती क्षेत्र में भीषण बाढ़ आई थी।  फिर भी भारत -नेपाल के पिलर संख्या -  223 बची रही , ऐसा कहना है क्षेत्रीय लोगों का। जो पुनः 1995 एवं 1997 के आक्रमणकारी बाढ़ में नदी के भीतर कहीं दब गई । इसके उपरांत सीमा पर 18वी बटालियन के डिप्टी कमांडेट मनोहर लाल ने दोनों देशों के संयुक्त अधिकारियों के साथ सीमा सर्वे किया था । उसी सर्वे में पिलर संख्या -223 तत्काल बांस गाड़कर चिन्हित कर दिया गया था , परन्तु चिन्हित बांस को या तो किसी ने उखाड़ फेंका या गायब हो गया, जिसके कारण बार -बार  विवाद पैदा होता है ।
    आश्चर्य यह है कि स्थानीय सीमावर्ती गांवों मे एक दूसरे के कुटुम्ब , गोतिया आदि संबंधों की प्रगाढता है फिर भी तिल को ताड़ बनाकर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया जा रहा है । चूंकि जानकारी मुताबिक पिलर संख्या -223 के दस गज जमीन के रिक्त स्थानों पर नेपाल के कई लोगों का खेत है जिसमें भारत के केसरी हिंदी जमीन पर भी नेपाल के लोग कब्जा जमाए हुए हैं।
    सूत्रो के अनुसार सप्तरी जिला के अंतर्गत तिलाठी गांव के लोगों के निजी स्वार्थ की पूर्ति से यह विवाद पैदा हुआ है ।  जबकि सीमा बांध `नो मेन्स लैंड` के दायरे में नहीं आ रही, ऐसा स्थानीय लोगों का मानना है । इस खाड़ो नदी के टूटे हुए तटबंध को तत्काल बंधवाने के लिए  जल संसाधन विभाग बीरपुर ने काफी प्रयास किया, ताकि निकटवर्ती गांवों मे पुनः पानी का प्रकोप न  हो । जिसके निमार्ण में नेपाली नागरिकों ने रोडाबाडी कर भारतीय नागरिकों व सेना,  पुलिस के जवानों को घायल कर दिया । ऐसे विवाद को शांत करने के लिए निर्मली जदयू विधायक अनिरूद्ध प्रसाद यादव, सासंद रंजीत रंजन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने महत्वपूर्ण पहल की परन्तु मामला जस का तस रहा ।
    सीमावर्ती क्षेत्रों की गर्माहट व बांध के पुन:निर्माण को लेकर जिलाधिकारी बैद्यनाथ यादव ने पहल करते हुए नेपाल के अलाधिकारियों के साथ कुनोली आईबी में बैठक की । ड़ीएम सुपौल व सप्तरी ड़ीपीओ आदि के मुताबिक दोनों देश के पांच अभियंताओ की कमेटी इस पर अध्ययन कर सरकार को अवगत कराएगी । साथ ही इस नदी की मिट्टी को निकाल कर इसको गहरा किया जाएगा । जिससे नेपाल का अतिरिक्त पानी निकल सकेगा । यह प्रोजेक्ट भारत सरकार को भेज दिया गया है।
    इन सबके बावजूद लोगों का कहना है कि इंडो - नेपाल का ऐतिहासिक मित्रता पर निजी स्वार्थ प्रश्न चिन्ह कैसे बना सकता है । भारत - नेपाल राजतंत्र से लेकर अभी तक मित्रता की मिसाल है,  फिर भी उच्च स्तरीय शासन –प्रशासन वर्तमान बाढ़ को देखते हुए ठोस निर्णय लेने में विलम्ब क्यों कर रहा है ?

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