Monday, October 23, 2017 Newslinecompact.com अपना होमपेज बनाएं |
newslinecompact Logo
banner add
संपादकीय
Publish Date: Jul 22, 2016
उत्तर प्रदेश में भी दिखने लगी राजनीतिक हलचल
title=

 नई दिल्ली( शुभम कुमार गुप्ता ):देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में चुनावी आहात अपने पैतरे दिखाने लगी है। भले ही अभी चुनाव लगभग 6 महीने दूर हो लेकिन विभिन्नराजनितिक दलों ने अपने अपने पत्ते बिछाने शुरू कर दिए हैं , अपनी तरफ से सभी पार्टीया कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती हैं , और इसी बात को ध्यान में रखते हुए राज्य में शासितसमाजवादी पार्टी ने तो कई जगह अपने प्रत्याशियों की घोषणा भी कई महीने पहले ही कर दी है , लेकिन इन सभी तथ्यों के बिच इस बार का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बहुत हीउम्दा और रोचक होता हुआ दिखाई दे रहा है साथ ही साथ राजनीतिक पार्टियां वोटों की जोड़-तोड़ और गुणा भाग में लगी हैं। ऐसे में प्रदेश में बनते नए सियासी समीकरण की बढ़तीसंभावना ने सियासी धुरंधरों के माथे पर बल ला दिया है। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद होने वाले इस विधानसभा चुनाव में मोदी सरकार की भी असली परीक्षा होगी और साथही साथ भाजपा के भविष्य का भी आकलन इस चुनाव के नतीजे से निकलकर सामने आ जाएगा , इसी को ध्यान में रखते हुए शायद भाजपा अपने मुख्य्मंत्री पद का उम्मीदवार घोषितकरेगी।

एक तरफ जहां कांग्रेस ने भी मीडिआ और कार्यकर्ताओं अटकलों को विराम देते हुए दिल्ली की सत्ता में 15 वर्ष तक काबिज रहने वाली और साथ ही ब्राह्मण चेहरा के रूप में शीलादीक्षित को यूपी में लांच किया है , उससे राजनीती में एक और मोड़ सामने आ गया है। मुख्य्मंत्री चेहरा के रूप में सपा की तरफ से अखिलेश यादव , बसपा की तरफ से बहन कुमारीमायावती पहले से ही जनता के बिच में चर्चित हैं , लेकिन अबतक भाजपा की तरफ से कोई नाम निकलकर सामने नहीं आया है , जो दूसरे पार्टियों के साथ साथ जनता के लिए भी प्रश्नचिन्ह बना हुआ है। कांग्रेस ने जिस तरह से शीला दीक्षित को मैदान में उतरा है उससे बीजेपी के अंदर खलबली मच गई है। उत्तर प्रदेश में पिछले कई दशक से मुख्यतः दो पार्टियांअपनी कार्यशैली व नेतृत्व को लेकर चर्चा में रही है। दोनों ही पार्टियों में अपनी विचारधारा और हाई-कमांड कल्चर समान रूप से लागू है और दोनों ही के नेता अपने महिमामंडन केऊपर अथाह खर्च करने में यकीन रखते हैं। इनके अलावा उत्तर प्रदेश में भाजपा तीसरी बड़ी पार्टी है, जो अपने तरीके से 2017 की गोटियां बिछाने में लगी हुई है, जिसे लेकर मायावतीने अंदेशा जाहिर किया कि बीजेपी यूपी विधानसभा चुनाव से पहले फिर राम मंदिर मुद्दा उठाएगी। लोहिया और कांशीराम के साथ राममंदिर मुद्दा तो सिर्फ बहाना है, असली निशाना तोउत्तर प्रदेश की गद्दी को हथियाना है।विधानसभा चुनाव की बात है तो अभी काफी कुछ उलझे हुए समीकरण दिख रहे हैं, किन्तु यह निश्चित है कि मुख्य रूप से सपा, बसपा औरभाजपा ही मुख्य लड़ाई में रहने वाले हैं। जिस प्रकार से बिहार चुनाव में नीतीश और लालू ने मिलकर भाजपा को धुल चटाई, उससे सीख लेने की सुगबुगाहट भी गाहे-बगाहे सुनायी देतीरहती है। हालांकि, बात अभी किसी सिरे लगी नहीं है।

इनके अलावा उत्तर प्रदेश में भाजपा तीसरी बड़ी पार्टी है, जो अपने तरीके से 2017 की गोटियां बिछाने में लगी हुई है, जिसे लेकर मायावती ने अंदेशा जाहिर किया कि बीजेपी यूपीविधानसभा चुनाव से पहले फिर राम मंदिर मुद्दा उठाएगी। लोहिया और कांशीराम के साथ राममंदिर मुद्दा तो सिर्फ बहाना है, असली निशाना तो उत्तर प्रदेश की गद्दी को हथियाना है।विधानसभा चुनाव की बात है तो अभी काफी कुछ उलझे हुए समीकरण दिख रहे हैं, किन्तु यह निश्चित है कि मुख्य रूप से सपा, बसपा और भाजपा ही मुख्य लड़ाई में रहने वाले हैं।जिस प्रकार से बिहार चुनाव में नीतीश और लालू ने मिलकर भाजपा को धुल चटाई, उससे सीख लेने की सुगबुगाहट भी गाहे-बगाहे सुनायी देती रहती है। हालांकि, बात अभी किसी सिरेलगी नहीं है।हांलाकि उत्तर प्रदेश में चुनाव जातिवाद के आधार पर होता है, वहीं कई महीने पहले से उत्तर प्रदेश मे अपना काडर खडा कर रहे असादुदीन ओवैसी समाजवादी पार्टी केलिये चुनौती बनने जा रहे है।

खैर इन सभी तथ्यों पे उत्तर प्रदेश की जनता को फैसला करना है की वह किसको अपनी पसंद बनाते है , आने वाले दिनों में शायद स्तिथि कुछ और भी साफ़ होने की उम्मीद है ,लेकिन जिस तरह से बसपा से छोड़कर जा रहे नेता और कांग्रेस का ब्राह्मण कार्ड ने राजनितिक समीकरण को बदला है , उससे राजनिति पैंतरों में कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी, बाकी समय आने पर तो सबके सामने होगा।

  • Post a comment
  • Name *
  • Email address *

  • Comments *
  • Security Code *
  • captcha
  •       
    कमेंट्स कैसे लिखें !
    जिन पाठकों को हिन्दी में टाइप करना आता है, वे युनीकोड मंगल फोंट एक्टिव कर हिन्दी में सीधे टाइप कर सकते हैं। जिन्हें हिन्दी में टाइप करना नहीं आता वे Roman Hindi यानी कीबोर्ड के अंग्रेजी अक्षरों की मदद से भी हिन्दी में टाइप कर सकते हैं। उदाहरण के लिए यदि आप लिखना चाहें- “भारत डिफेंस कवच एक उपयोगी पोर्टल है’, तो अंग्रेजी कीबोर्ड से टाइप करें,हर शब्द के बाद स्पेस बार दबाएंगे तो अंग्रेजी का अक्षर हिन्दी में टाइप होता चला जाएगा। यदि आप अंग्रेजी में अपने विचार टाइप करना चाहें तो वह विकल्प भी है।