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राज्यों से
Publish Date: Jul 21, 2016
दबंगों ने हड़प ली थी जमीन, मजबूरी ने बनाया नक्सली: प्रेमनाथ भगत
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रांची।

हम लोगों की 15 एकड़ खतियानी जमीन दबंगों ने हड़प ली। इसके बाद मेरे घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गयी। खेती-बारी से ही मेरे घर की रोजी-रोटी चलती थी। जमीन नहीं रहने से मेरे परिवार का जीना मुश्किल हो गया। मेरी जमीन हड़पनेवाले दबंगों में लाल गोप, बंधु उरांव, लक्ष्मण गोप, सूजन उरांव, सहित कई लोग शामिल थे। जमीन हड़पे जाने और दबंगों के शोषण की वजह से मैं नक्सली बन गया।

ये बातें भाकपा माओवादी के पूर्व जोनल कमांडर प्रेमनाथ ने विशेष बातचीत में हिन्दुस्थान समाचार के संवाददाता से कही। प्रेमनाथ भगत ने बताया कि 2002 में वह पहली बार नक्सली दस्ते के संपर्क में आया। इसी दौरान उसकी पहचान नक्सली बबलू से हुई। 2009 में वह सिमडेगा-कोलेबिरा क्षेत्र का एरिया कमांडर बना। जब 2011 में बबलू पकड़ा गया। तब मुझे सबजोनल कमांडर बनाया गया। प्रेमनाथ ने बताया कि संगठन के लिए उसने कई काम किये। लेकिन पैसे उतने नहीं मिलते थे कि घर चलाया जा सके। बाद में तमाड़ आने-जाने के क्रम में उसकी पहचान जैकलिन मिंज से हुई। 2014 में भगत ने जैकलिन से शादी कर ली। शादी के बाद स्थिति यह हो गयी कि घर चलाने के लिए पैसे नहीं रहते थे। 2015 में जैकलिन गर्भवती हुई, तब अस्पताल जाने के लिए घर में पैसे नहीं थे।

पुलिस प्रेमनाथ को खोज रही थी, इस वजह से वह अपनी पत्नी से मिलने भी नहीं जा पा रहा था। ऐसी स्थिति में उसकी पत्नी ने अपने मां-बाप से पैसे मांगकर उसके बेटे को जन्म दिया। इसी दिन के बाद से उसकी पत्नी उसपर दबाव डालने लगी कि आप सरेंडर कर दो। इसके बाद प्रेमनाथ ने बहुत सोचकर सरेंडर कर आम आदमी की जिंदगी जीने का निश्चय किया। वह आज अपने बेटे अंकित और पत्नी जैकलिन के साथ जीविकोपार्जन कर रहा है। उसकी पत्नी हिस्ट्री आनर्स लेकर बीए कर रही है। सरेंडर करने के बाद उसकी जिंदगी खुशहाल है। प्रेमनाथ राज्य के विकास में कंधे से कंधा मिलाकर राज्य में अपना पूरा योगदान देने को तैयार है। गौरतलब है कि प्रेमनाथ ने कुछ दिनों पहले ही डीजीपी के समक्ष सरकार की सरेंडर नीति के तहत सरेंडर किया था। उसे तत्काल 50 हजार रुपये सरेंडर नीति के तहत डीजीपी ने दिये थे।

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