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राज्यों से
Publish Date: Jul 18, 2016
भौती गौशाला में भूसा खत्म हो जाने से भूख से तड़प रहीं गायें
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कानपुर।

पिछले दिनों गाय के नाम पर वाहवाही लूटने वालों ने अखलाक को मौत के घाट उतार दिया। शहर के महाराजपुर थाने में गाय के अवशेष मिलने पर लोगों ने शक के अधार पर एक मुस्लिम युवक के परिवार को गांव से निकाल दिया। लेकिन शहर से सटे भौती गौशाला में भूसा खत्म हो जाने के चलते पांच सौ से ज्यादा गाय 72 घंटे से भूख के चलते तड़प रही हैं। वहीं तीन दर्जन गाय बीमार पड़ गई हैं। आपको बता दें कि भौती गौशाला में तीन महीने पहले संगठन का चुनाव हुआ था। नए पदाधिकारी चुन कर आए थे, लेकिन कार्यभार संभालने के बाद से ही गायों की दुर्दशा शुरु हो गई। गायों के भोजन पानी के लिए खाते में करोड़ो रुपए जमा होने के बावजूद भौती गौशाला में हरी घास और भूसे की कमी है। गौशाला में मौजूद पांच सौ से ज्यादा गाय को एक हफ्ते से दिन में एक किलो भूसा दिया जा रहा है, जबकि अगर पशु चिकित्सिक की मानें तो गाय को दिनभर में आठ किलो भूसे के अलावा दो किलो हरी घास देनी चाहिए।

भौती गौशाला के कर्मचारियों ने बताया कि गोदाम पूरी तरह खाली पड़ा है। वहीं घास की भी व्यवस्था नहीं है। कर्मचारियों की मानें तो महामंत्री श्याम अरोड़ा इसके लिए जिम्मेदार हैं। महामंत्री ने जुलाई महीने के पहले सप्ताह में सिर्फ खानापूर्ति के नाम पर मात्र 25 क्विंटल भूसा भेजा था। जिसके तहत गायों का दिन में एकबार 1 किलो भूसा देने का फरमान दिया गया था। 15 जुलाई आते आते भूसा गोदाम से खत्म हो गया। भौती गौशाला के कर्मचारियों ने इसकी जानकारी महामंत्री को दी, लेकिन उन्होंने भूसे की कोई व्यवस्था नहीं की। कर्मचारियों का आरोप है कि गाय के दूध और दवा के जरिए गौशाला ट्रस्ट को हर महीनें लाखों रुपए की कमाई होती है, लेकिन वो सारी रकम हजम कर रहे हैंष

भौती गौशाला यूपी का सबसे बड़ी गौशाला के नाम में शुमार है। गौशाला के पास करीब 1500 बीघा जमीन है। लेकिन ट्रस्ट और प्रशासन के चलते ये मात्र 50 बीघे में सिमट कर रह गई है | गौशाला की जमीन पर एक गांव बनकर तैयार हो गया हैं जिनमें बांग्लादेश से आए करीब 500 परिवार अपना आशियाना बनाकर रह रहे हैं। इसके साथ ही ट्रस्ट ने गौशाला की जमीन को कई बिल्डरों और इंजीनियरिंग कॉलेज को लीज पर दे रखा है। गौशाला ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि भौती में जो हो रहा है वो नियम के विरुद्व है। उन्होंने कहा कि हमारी गाय भूख से चड़प रही हैं और ट्रस्ट के पदाधिकारी गौशाला की रकम से अपनी कमाई रहे हैं। पशु चिकित्सक हरिओम पांडेय ने बताया कि बरसात के मौसम में जानवरों को अनेक बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती हैं। वहीं अगर उन्हें समय से चारा पानी नहीं मिला तो उनकी जान भी जी सकती है। डॉक्टर पांडेय के मुताबिक प्रतिदिन एक गाय को आठ किलो भूसे के साथ ही दो किलो हरी घास देनी चाहिए। इससे कम भोजन मिलने पर गाय बीमार पड़ सकती हैं।

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