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देश
Publish Date: Sep 17, 2016
समाजवादी कुनबे में उठा सियासी तूफान अभी थमा नहीं, आज तय होगा कि टिकट बंटवारे का असली मुख्या कौन होगा...
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 नई दिल्ली/लखनऊ।  समाजवादी पार्टी का झगड़ा अभी थमा नहीं है. कल दिन भर चले मान मनौव्वल के बाद अब पूरा मामला टिकट बंटवारे का बॉस कौन होगा इस पर आकर टिक गया है. मुलायम आज इस पर फैसला लेने वाले हैं. अखिलेश यादव कह रहे हैं कि सब बात मानने को तैयार हूं लेकिन टिकट बांटने का अधिकार उनको मिलना चाहिए. इधर शिवपाल इसके लिए तैय़ार होते दिख नहीं रहे. सुलह के फॉर्मूले के बाद चाचा शिवपाल, भतीजे अखिलेश को फिर से मुख्यमंत्री बनाने की बात कह रहे हैं. लेकिन, जितनी आसानी से शिवपाल ये बात कह रहे हैं उतना आसान समाजवादी कुनबे में सब दिख नहीं रहा हैं. असली पेंच अब फंसा है टिकट बंटवारे के अधिकार को लेकर. टिकट बंटवारे का अधिकार जिसके पास होगा, चुनाव में वो अपने समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा टिकट देगा. जो बाद में सरकार बनाने की स्थिति में अपने नेता का साथ देंगे. अखिलेश यादव यही अधिकार अपने पास रखना चाहते हैं. जबकि प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से ये अधिकार नियम के मुताबिक शिवपाल यादव के पास रहने वाला है. इसीलिए अखिलेश के समर्थक शिवपाल के अध्यक्ष बनाये जाने पर सवाल खड़े कर रहे हैं. इस बार ये पूरा विवाद ही प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर शुरू हुआ है. 13 सितंबर को मुलायम ने अखिलेश को हटाकर शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी तो उसी दिन अखिलेश ने शिवपाल से 7 मंत्रालय छीन लिए.

इसके बाद शिवपाल ने मंत्री और अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे दिया. अब सवाल ये है कि टिकट बंटवारे के अधिकार का ये विवाद कैसे खत्म होगा ? मुलायम सिंह यादव से जुडे सूत्रों के मुताबिक मुलायम सिंह टिकट बांटने को लेकर मचे घमासान पर एक बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं. उनका फॉर्मूला ये है कि अखिलेश यादव और शिवपाल यादव मिलकर टिकट का फैसला करेंगे और उसपर आखिरी मुहर मुलायम सिंह लगाएंगे. जहां तक शिवपाल और अखिलेश की राजनीतिक हैसियत की बात है तो शिवपाल, मुलायम के छोटे भाई होने के साथ ही पुराने और अनुभवी हैं. संगठन पर उनकी पकड़ है. हर जिले में उनके लोग हैं. जबकि अखिलेश मुलायम के बेटे होने के साथ ही पार्टी का चेहरा हैं. साफ छवि के अखिलेश में पार्टी अपना भविष्य देखती है. यही वजह है कि मुलायम दोनों में से किसी को भी अलग करके समाजवादी राजनीति की कल्पना आज की तारीख में नहीं कर सकते. डर इस बात का भी है अगर परिवार में यूं ही सत्ता के लिए संघर्ष चलता रहा तो मुस्लिम वोटर उनका साथ छोड़कर कांग्रेस या बीएसपी के खेमे में चले जाएंगे. जबकि, मुस्लिम वोट पर मुलायम की पकड़ काफी अच्छी है. इसके साथ ही अखिलेश की साफ छवि का लाभ भी उन्हें मिल सकता है.
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