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देश
Publish Date: Sep 11, 2016
अपनी भीड़ के खुद ही रिकॉर्ड तोड़ रही है बसपा
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न्यूज़लाइन नेटवर्क

सहारनपुर। सियासी रैली में भीड़ का रिकार्ड बनाना और खुद ही अगली बार उसे तोड़ देना, यह काम बहुजन समाज पार्टी बेहतर प्रबंधन के साथ कर रही है। सहारनपुर के इतिहास में रैली का नाम आते ही बसपा का हुजूम सियासी लोगों के जहन में उमड़ने लगता है। बसपा की रैली में भीड़ का रिकार्ड आज तक कोई दल नहीं तोड़ पाया है। उसे तोड़ा है तो हर बार खुद बसपा ने। यहां तक कि कोई मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री भी इस रिकार्ड को छू नहीं पाए।

बात 1995 की है, जब मुलायम सिंह यादव बहुजन समाज पार्टी के सहयोग से यूपी में सरकार चला रहे थे और मायावती सुपर चीफ मिनिस्टर कहलाती थीं। उन्होंने सहारनपुर में बसपा कार्यालय के लिए शासन से भवन अलॉट करने को कहा था। मुलायम सिंह यादव ने बड़ी चतुराई से चंद्र नगर की एक कोठी बसपा कार्यालय के लिए अलॉट कर दी थी, जिसमें एक कर्नल का परिवार रहता था और इसे लेकर काफी हंगामा हुआ था। इसे लाल कोठी कहा जाता था। पूर्व विधायक शशिबाला पुंडीर और तमाम भाजपा नेता हथियारों के साथ इस कोठी की सुरक्षा में तैनात हो गए थे। अंतत: क्रास मुकदमे दर्ज हुए और मायावती को भी राजनीतिक शक्ति दिखाने के लिए तब मजबूर होना पड़ा और उन्होंने सहारनपुर के गांधी पार्क मैदान में रैली की घोषणा की थी।
इस गांधी पार्क मैदान को आज भी सियासी दल शामियाने और कनात लगाकर कवर करते हुए पूरी ताकत लगाकर भर पाते हैं। तब पहली बार मायावती की रैली में यह मैदान न सिर्फ पूरी तरह भरा था, बल्कि पूरा शहर भी जाम हो गया था। इस भीड़ के रिकार्ड को कोई दूसरा दल कभी नहीं तोड़ पाया। हालांकि इसके बाद लगातार सियासी रैलियां हुईं, लेकिन भीड़ और वैसा जुनून देखने को नहीं मिला। इस रिकार्ड को हमेशा बसपा ने ही तोड़ा, न सिर्फ तोड़ा बल्कि अगली बार के लिए नया लक्ष्य भी तय किया। आज 11 सितंबर 2016 को बसपा ने भीड़ के मामले में एक नई इबारत फिर लिखी है। हालांकि, खुद मायावती ने यह साफ किया कि यह रैली सहारनपुर, मेरठ मंडल के जिलो के अलावा बिजनौर जिले की थी और इसमें हर जिले से लक्ष्य रखा गया था। मगर यह कहना भी नहीं भूलीं कि दूसरे दलों की तरह हमने पड़ोस राज्य हरियाणा, उत्तराखंड से यहां भीड़ या कार्यकर्ताओं को नहीं बुलाया।
जिस कॉसमॉस सिटी मैदान में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रैली की, उसी मैदान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार के दो साल पूरे होने पर पिछले दिनों विकास पर्व महारैली की थी। इस रैली में भी हालांकि बेतहाशा भीड़ उमड़ी थी, लेकिन बसपा की रैली ने दिखा दिया कि भीड़ कैसे जमा होती है और कैसे उमड़ती है। 7 बीघा रकबे का यह मैदान सुबह छह बजे से भरना शुरू हो गया था और 11 बजे तक पूरी तरह से पैक नजर आ रहा था। सहारनपुर कलेक्ट्रेट से लेकर रैली स्थल तक 7 किमी लंबे दिल्ली रोड पर रैली में जाने वाले लोग थमे थे। सरक इसलिए नहीं पा रहे थे कि रैली स्थल के बाहर मुख्य मार्ग तक भीड़ जम चुकी थी।
सियासी नजरिए से रैली में मुस्लिमों की भागेदारी भी चौंकाने वाली रही है। यही वजह भी है कि मायावती ने मुस्लिमों पर भाषण को काफी केंद्रित रखा। सहारनपुर की सात में से पांच सीटों पर बसपा का कब्जा है। यहां की बेहट विधानसभा सीट से बसपा विधायक निर्वाचित हुए महावीर राणा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण बसपा से निलंबित कर दिया गया था, जो अब भाजपा में हैं। भाषण और भीड़ के हिसाब से यदि मायावती की कास्ट केमिस्ट्री परवान चढ़ती है तो आसन्न विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा, सपा और कांग्रेस के लिए खासी दिक्कत पैदा हो सकती हैं।

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