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Publish Date: Aug 23, 2016
देवभूमि के इस गांव में हनुमान को समझा जाता है दुश्मन, नहीं होती है पूजा क्यों...?
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 नई दिल्ली। मंगलवार का दिन संकटमोचन हनुमान को समर्पित है. हमें बचपन से ही सिखाया जाता रहा है कि बुरे वक्त में हनुमान को याद करें. कहते भी हैं कि भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान का नाम लेने भर से ही तमाम कष्ट दूर हो जाते हैं. भारत ही नहीं दुनियाभर में करोड़ों हिन्दू हनुमान की पूजा करते हैं. उत्तराखंड को तो देवभूमि कहा जाता है, यहां 33 कोटि के देवताओं की पूजा होती है. लेकिन उत्तराखंड में ही एक ऐसी जगह भी है, जहां हनुमान की पूजा नहीं होती बल्कि लोग उनसे नाराज रहते हैं. जी हां यह सच है. उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ-नीति मार्ग पर करीब 14000 फुट की ऊंचाई पर एक छोटा सा गांव द्रोणागिरि है. द्रोणागिरि पर्वत पर बसे इस गांव के बारे में मान्यता है कि रामायण काल में लक्ष्मण के मूर्छित होने पर संजीवनी बूटी की खोज में आए बजरंगबली हनुमान जिस पर्वत को उठाकर ले गए थे, वह यहीं पर स्थित था. द्रोणागिरि के लोग इस पर्वत की पूजा करते थे और आज भी इसके एक हिस्से की पूजा यहां के ग्रामीण करते हैं. संकटमोचन के इसी कृत्य के कारण यहां के लोग इतने क्रोधित हैं कि वे अब तक हनुमान की पूजा नहीं करते. द्रोणागिरि निवासी इसलिए तो नाराज हैं ही कि हनुमान ने उनकी संजीवनी बूटी चुरा ली थी, इसकी और वजह भी हैं. ग्रामीणों के मुताबिक जिस वक्‍त हनुमान संजीवनी बूटी लेने आए उस वक्त उनका पहाड़ देवता ध्‍यान मुद्रा में था. स्‍थानीय लोगों की यह मान्‍यता रही है कि उनके पहाड़ देवता ग्रामीणों को दिखाई देते हैं. जब हनुमान बूटी लेने यहां आए तो उन्‍होंने पहाड़ देवता से इसके लिए इजाजत भी नहीं ली और न ही उनकी ध्‍यान-सा‍धना पूरी होने का इंतजार किया. बल्कि वे हनुमान पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने उनके पहाड़ देवता का ध्‍यान भंग कर दिया.

दंत कथाओं के अनुसार हनुमान ने द्रोणागिरि के पहाड़ देवता की दायीं भुजा भी उखाड़ दी थी. स्थानीय वेबसाइट उत्तरांचलटुडे के अनुसार द्रोणागिरि में मान्‍यता है कि आज भी उनके पहाड़ देवता की दायीं भुजा से खून बह रहा है, यह भी एक वजह है कि यहां के लोग आज तक बजरंगबली से नाराज हैं और उनकी पूजा नहीं करते. इस मान्यता को पर्यावरण के प्रति पहाड़ के लोगों की सजगता से भी जोड़कर देखा जा सकता है. यहां के ग्रामीण मिसाल पैदा करते हैं कि अपने पहाड़ के जल, जंगल और जमीन को सुरक्षित रखने के लिए वे भगवान से भी नाराज हो सकते हैं, तो फिर इंसान क्या चीज हैं.

 

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